त्रिनयनी ने जिस तरीके से अपनी बात रखी हमारे सामने और हमें मार्ग दर्शन दिया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. कुछ संस्थाओं ने भी मार्ग दर्शन कियालेकिन उन्होंने विकालांंगता का एक ही प्रकार समझाया, लेकिन त्रिनयनी की तरफ से सभी बातें बताई गयीऔर ये सब समझने मैं काफी आसान थी, क्यूंकि ये सब हिंदी में था. इसकी सहायता हमें हमारे काम में हो रही है